STORYMIRROR

Mukesh Chand

Abstract

3  

Mukesh Chand

Abstract

वक्त का सितम

वक्त का सितम

1 min
366

वक्त का सितम कुछ इस कदर है

ना जाने वो किधर हम किधर हैं

हर लम्हा दृढ़ता इधर है

पर मुझको जोड़ता इधर है।

कितनी भी दूर हो मगर मुझे जोड़ता इधर है

उसके होने से ही जिंदगी मेरे साथ है

जिंदगी में बिताया हर पल उतना ही खास है

उतना उस लम्हे का मुझे अहसाह है।

आंखों से ओझल है मगर दिल के पास है

दिल से जुड़ा हर एक एहसास है।

एहसास होने से ही तो कुछ तो बात है

बातो से ही तो यादो की बरसात है।

वक्त का सितम कुछ इस कदर है

ना जाने वो किधर हम किधर है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract