STORYMIRROR

अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Inspirational

2  

अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Inspirational

विषतुल्य हो जब बातें

विषतुल्य हो जब बातें

1 min
93

दिल पर घात जब लगे,

मानव में पशुता दिखे,

ज्वाला प्रतिहिंसा जले,

संत से असंत बनें।

घाव जब कुरदने लगे,

शत्रुता पथ बड़ने लगे,

विषतुल्य हो जब बातें,

तब प्रेम मंत्र मिटने लगे।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational