विश्वास
विश्वास
जोश अविरल बहता मन में
कुछ असंभव करके दिखाने को
सागर सा विश्वास परस्पर
अँधेरे में दीप जलाने को
है अधरों में कुछ प्यास अधूरी
सहज अमृत पीने का वर पाने को
कर्म सुकर्म हो जाए मेरे
इस धरती पर स्वर्ग को पाने को
निरंतर आगे बढ़ना है
कुछ उज्ज्वल पुण्य कमाने को
हैं अभिलाषा अपार इक मन में
अपना जीवन सफल बनाने को।
