Uma Pathak
Action
जब मैं सरहद में लड़ने जाऊंगा
वीर नायक बनकर आऊंगा।
मातृभूमि की रक्षा में
तिरंगे में लिपट जाऊंगा।
वर्षा हो या गर्मी हो
वही पर डट जाऊंगा।
दुश्मनों का मैं अंत कर
देश को बचाऊंगा।
बच्चे
एक औरत की
नायक
गरीबी
पहला प्यार
दुर्घटना
अंतरिक्ष
प्रेम
होली
पशु पक्षी और ...
मैं अकेले में खुद से बातें किया करती थी मैं अकेले में खुद से बातें किया करती थी
कोशिश करने से हर मुश्किल हल हो जाती आज नहीं तो कल, मेहनत सफल हो जाती ।। कोशिश करने से हर मुश्किल हल हो जाती आज नहीं तो कल, मेहनत सफल हो जाती ।।
व्यतीत किया करते हैं, यह हम सबने देखा है...! व्यतीत किया करते हैं, यह हम सबने देखा है...!
मेरी कलम से ऐसे सेवक के लिए बस दुआएं ही दुआएं हैं.. मेरी कलम से ऐसे सेवक के लिए बस दुआएं ही दुआएं हैं..
जीवन सतत् हार का सिलसिला है! सत्यवादी का कहते पेंच ढीला है! जीवन सतत् हार का सिलसिला है! सत्यवादी का कहते पेंच ढीला है!
हमें हालांकि आप पर पूरा विश्वास था हमें हालांकि आप पर पूरा विश्वास था
सपनों के दीप जलाऊं फिर, जीवन को दूं एक नई लय। सपनों के दीप जलाऊं फिर, जीवन को दूं एक नई लय।
ज़रा समझें दूसरों का भी दुःख-दर्द, केवल खामियाँ ही न निकालते फिरें बेसिरपैर ज़रा समझें दूसरों का भी दुःख-दर्द, केवल खामियाँ ही न निकालते फिरें बेस...
दरवाजे बंद, घर सूना है क्यों? क्या हुआ है सखी, क्या तेरा मन मौन? दरवाजे बंद, घर सूना है क्यों? क्या हुआ है सखी, क्या तेरा मन मौन?
धर्म के नाम पर... क्यों अधर्मी हो जाता है। धर्म के नाम पर... क्यों अधर्मी हो जाता है।
भाई चारे के नाम पर हमें काट रहे हैं हम महंगाई बेरोजगारी को रो रहे हैं भाई चारे के नाम पर हमें काट रहे हैं हम महंगाई बेरोजगारी को रो रहे हैं
फिर यह समाज औरतों को पढ़ने से रोकता क्यों नहीं? फिर यह समाज औरतों को पढ़ने से रोकता क्यों नहीं?
खुद की रक्षा स्वयं करो कोई श्याम नहीं आने वाला खुद की रक्षा स्वयं करो कोई श्याम नहीं आने वाला
हालांकि कोई शौक़ से लेता नहीं अवकाश... कभी-कभी तो किसी के अप्रत्याशित हालांकि कोई शौक़ से लेता नहीं अवकाश... कभी-कभी तो किसी के अप्रत्याशित
भकुवामारी गाँव, आलिसिंगा, शोणितपुर, असम के हमारे घर का पूरा दायित्व भकुवामारी गाँव, आलिसिंगा, शोणितपुर, असम के हमारे घर का पूरा दायित्व
ये उनकी पुरानी आदत है जो कभी 'नहीं सुधरेगी... ये उनकी पुरानी आदत है जो कभी 'नहीं सुधरेगी...
जिससे हम अब तक उभर न पाए...। जिससे हम अब तक उभर न पाए...।
दिल मसोस कर रह जाती धूप देखकर रूप कोहरे का बर्फीला। दिल मसोस कर रह जाती धूप देखकर रूप कोहरे का बर्फीला।
तुम्हारी पुण्यतिथि पर, नैन ये छलक रहे, तुम्हारी वाणी के स्वर, गूंजते दूर तलक रहे। तुम्हारी पुण्यतिथि पर, नैन ये छलक रहे, तुम्हारी वाणी के स्वर, गूंजते दूर तलक ...
चाहे मूषक तहस-नहस कर डाले, बिल्ली को तो मुफ्त मिल जाए। चाहे मूषक तहस-नहस कर डाले, बिल्ली को तो मुफ्त मिल जाए।