STORYMIRROR

Surendra kumar singh

Inspirational

4  

Surendra kumar singh

Inspirational

विचारों सा ये तुम्हारा आना

विचारों सा ये तुम्हारा आना

1 min
187


विचारों सा ये तुम्हारा आना

अटकलों और अफवाहों के बीच

जब हम लीन थे ध्यान में

करते हुये योग।

ध्यान तुममें हो गया

और एक विस्मय से

अभिसिंचित हो गये हम

जाने कितने भावों का

जाने कितने विचारों का

जाने कितनी किताबों का

जाने कितने दृश्य और

अदृश्य तत्वों का योग हैं हम।

विचारों सा ये तुम्हारा आना

विस्मय से अभिसिंचित हम

सोच रहे हैं

क्या नाम दें तुम्हारा

नामों से बहुत भिन्न हो तुम

मेरे प्रिय

दुनिया के लिये अजनबी भी।

तुम्ही बताओ

क्या नाम दूँ तुम्हे

मेरी अदृश्य शक्ति

माँ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational