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Usha Gupta

Inspirational

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Usha Gupta

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विचारें की श्रृखंला

विचारें की श्रृखंला

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है विज्ञान की उन्नति शिखर पर आज,

परन्तु नहीं बना सके हैं मानव मस्तिष्क

सरीखा यन्त्र कोई,

लगा सके जो दौड़ तेज़ इतनी,

कि बैठा भारत में व्यक्ति तुरन्त 

पहुँचे अमेरिका के डिज़नीलैण्ड,

पल भर में कर विश्वभ्रमण

लौट पड़े तभी वापिस घर अपने।


विचार श्रृखंला मानव मस्तिष्क की 

रात और दिन चलती ही रहती बिन थके।

नये-नये विचारों की मस्तिष्क में चलती रहती श्रृखंला,

घूमते शोध के विचार वैज्ञानिकों के मस्तिष्क में,

तो पौराणिक कथाओं की तह तक पहुँच जाती 

 इतिहासकार की विचार श्रृखंला,

पहुँच पाती पुलिस अपराधी की गरदन तक,

घुम-घुमा रात दिन कड़ी अपने विचारों की।

बालक, जवान या बुज़ुर्ग, हो विद्यार्थी या कर्मचारी,

घूम रही विश्व की मशीन, है धुरी जिसकी

विचारों की श्रृखंला मानव मस्तिष्क की।


दी है शक्ति मानव को प्रभु ने,

करने की पहचान उचित और अनुचित की,

करते आकर्षित अधिक अनुचित विचार,

और ले जाते खींच अपराध की ओर।

है आवश्यक लगाना लगाम,

इस अवांछनीय श्रृखंला पर,

मोड़ना है सही दिशा में सोच की कड़ी को,

अन्यथा जायेंगे बह सैलाब में अपराध के।


है विचार शक्ति देन विशिष्ट मानव को ईश्वर की,

है आयुध यह, करना है प्रयोग जिसका हमें सावधानी से,

चलाया यदि इस शस्त्र को दिशा में ग़लत,

तो पड़ सकते हैं भुगतने परिणाम भी भयंकर,

अत: है आवश्यक रखना क़ाबू में विचार श्रृखंला को,

छू सकते हैं आकाश की ऊँचाइयों को कर सही प्रयोग,

धँस सकते हैं धरती में कर त्रुटिपूर्ण प्रयोग,

प्रभु की इस अनन्य भेंट का।


है कोटि-कोटि नमन और धन्यवाद

 ईश्वर को इस उपहार का।।




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