STORYMIRROR

Vijay Kumar parashar "साखी"

Abstract

4  

Vijay Kumar parashar "साखी"

Abstract

वाहवाही

वाहवाही

1 min
498

लोगों की वाह में खो मत जाना

लोगों की वाह में सो मत जाना


ये तारीफें बाद में बड़ा रुलायेगी,

इनके भंवर में उलझ मत जाना


ये लोगों की बेमतलब की वाह,

तेरे दिल से निकाल देगी आह,


झूठे लोगो की मीठी जुबान से

तू ख़ुद को पागल कर मत जाना


कागज़ के फूलों से 

खुश्बू नही आती है

इन मतलबी लोगों से

खुशी आती नहीं है


इन बनावटी लोगो की बातों से,

तू साखी बनावटी हो मत जाना


तू इस वाहीवाही के चक्कर में, साखी

तू लोगों की बातों में कैद हो मत जाना।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract