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Vishu Tiwari

Inspirational

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Vishu Tiwari

Inspirational

वाचिक चामर छंद

वाचिक चामर छंद

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देख दृश्य था वीभत्स टारते बढ़े चलो।

संकल्प कर्ज राष्ट्र का उतारते बढ़े चलो।।


झूके नहीं नरेंद्र शीश भारती के मान का,

राष्ट्रीयता का भाव भी निखारते बढ़े चलो।।


समृद्ध हो ये मातृभूमि यथेष्ठ प्राणतत्व हो,

विकार जो हृदय में हो संहारते बढ़े चलो।।


समानता का भाव हो न दम्भ का प्रभाव हो,

विनम्र हो स्वभाव सौम्य धारते बढ़े चलो ।।


विपत्तियों में धैर्य से विकास हेतु योजना,

त्याग मोह लोभ तू  सॅंवारते बढ़े चलो।।


समग्र दासता मिटा , दीनता मिटा सको,

हो समर्थ राष्ट्र को पुकारते बढ़े चलो।।


रोजगार हाथ में सदा हो नौनिहाल के,

प्रतिभाओ को साथ में निखारते बढ़े चलो।।


न शत्रुता का भाव हो सप्रेम का प्रभाव हो,

प्रबुद्ध बुद्ध मार्ग को निहारते बढ़े चलो।।


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