ऊंचाइयों की ओर
ऊंचाइयों की ओर
ऊंचाइयों की ओर हम सभी को बढ़ना है।
बदलते परिवेश में हम सबको ही ढलना है।।
ऊंचाइयों की ओर बढ़ते कदम कभी रूकने न पाएं।
आओ सामाजिक प्राणी होने के नाते फ़र्ज़ निभाएं।।
दुखिया इस संसार में सबको सुख पहुंचाते जाएं।
प्रेम और प्रेरणा का सुंदर संदेश सभी तक पहुंचाएं।।
ऊंचाइयों की ओर बढ़ने का रहता है सदा दौर।
आप सभी को करना चाहिए मेरी सीख पर गौर।।
स्नेह की सदैव बांध कर रखिए मजबूत डोर।
माना कि चलता नहीं किसी पर भी हमारा ज़ोर।।
ऊंचाइयों की ओर अपनी नई पीढ़ी को भी बढ़ाएं।
हर्षोल्लास के साथ उन्हें भी भोर में अवश्य जगाएं।।
सद्व्यवहार करते हुए सुकर्मों में अपना मन लगाएं।
तन से सच्ची सेवा करते हुए ज्ञान रूपी धन कमाएं।।
ऊंचाइयों की ओर हम सभी को हर उम्र में बढ़ना चाहिए।
कभी भी किसी के रास्ते का रोड़ा हमें नहीं बनना चाहिए।।
आहिस्ता-आहिस्ता ही नेक राह पर अग्रसर रहना चाहिए।
हमें गले का हार बनकर अपनी उमंग में ही रहना चाहिए।।
