उथल पुथल
उथल पुथल
गलियों के कुत्ते पूछ रहे
इंसानों की बस्ती में सन्नाटा क्यों है ?
चौराहों के परिंदे हैरान से
वो देना फेंकते इंसान कहां है ?
मंदिरों के बाहर बैठे खोजते
भक्तों की लंबी कतार कहां है ?
लाल बत्ती पर बेचने वाले निहारते
वो गाड़ियों का लंबा जाम कहां है ?
सड़कों किनारे उतावले बंदर सोचते
हम से बने इंसान फिर बंदर बन चले क्या ?
इस उथल पुथल में प्रकृति पूछती
हवा पानी गांव शहर इतने स्वच्छ कैसे ?
