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संदीप सिंधवाल

Abstract

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संदीप सिंधवाल

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उथल पुथल

उथल पुथल

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गलियों के कुत्ते पूछ रहे 

इंसानों की बस्ती में सन्नाटा क्यों है ? 

चौराहों के परिंदे हैरान से 

वो देना फेंकते इंसान कहां है ?


मंदिरों के बाहर बैठे खोजते

भक्तों की लंबी कतार कहां है ?

लाल बत्ती पर बेचने वाले निहारते

वो गाड़ियों का लंबा जाम कहां है ?


सड़कों किनारे उतावले बंदर सोचते

हम से बने इंसान फिर बंदर बन चले क्या ?

इस उथल पुथल में प्रकृति पूछती 

हवा पानी गांव शहर इतने स्वच्छ कैसे ? 


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