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Kishan Negi

Abstract Romance

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Kishan Negi

Abstract Romance

उसके ही ख्यालों में

उसके ही ख्यालों में

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बस यूं ही पुराने ख्यालों में

खोए रहने की आदत-सी हो गई है

कोशिश तो करता हूँ कि

निकल जाऊँ इस दलदल से

मगर क्या करूं

ख्याल भी उसके आते हैं

गुफ्तगू हुई नहीं जिससे कभी

शायद जानती वह भी नहीं होगी कि

कहीं दूर खोया रहता है कोई अनजान

उसके ही ख्यालों में सुबह शाम

बस इक दिन यूं ही 

नजरें टकरा गई थी उससे चलते चलते

उसका मंद-मंद मुस्कुराना 

हवाओं में बिखरी ज़ुल्फ लहराना

बादलों को देख अंगड़ाई लेना

उसकी इन्हीं अदाओं पर

आंखों से नींद गायब थी

मन की तरंगें उड़ने को बेकरार थी

बहुत समझाया था ख़ुद को भी

मगर ये नशा कुछ ऐसा चढ़ा कि

होश गंवा बैठा, कुछ सूझता नहीं

करूं भी तो क्या करूं

करने को भी तो कुछ बाक़ी न था

सिवा इसके कि 

खोया रहूँ बस उसके ही ख्यालों में

 



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