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Jyoti Dhankhar

Abstract

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Jyoti Dhankhar

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उसका चले जाना

उसका चले जाना

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वो धुंधली पड़ रही यादें 

वो खामोश सा उसका चेहरा 


यूं बोलती उसकी वो गहरी आंखें

जैसे समंदर कोई प्यासा 


जितना उसको जाना कम ही जाना 

उसका वो मेरी दुनिया से दूर जाना 


अब यादों का धूमिल हो जाना 

जैसे किसी गुब्बार का निकल जाना 


और गोधूली बेला में घर लौट आना 

पर उन गहरी आंखों का ठहर जाना 


फिर उस समंदर का प्यासा रह जाना 

या कि जैसे गर्मी में एक तालाब का सूख जाना।


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