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मैं राग...तुम गीत
मैं स्वास...तुम संगीत
मैं शायर... तुम ग़ज़ल
मैं क़लम... तुम अल्फ़ाज़
मैं विष... तुम शिव
मैं पात... तुम वृक्ष
मैं ज्योति... तुम दीप
मैं आंख...तुम काज़ल
मैं हवा... तुम सुगंध
मैं डोर... तुम पतंग
मैं गायक... तुम ग़ज़ल
मैं समुद्र... तुम लहर
मैं रंग... तुम रूप
मैं छांव... तुम धूप
मैं ऋतु... तुम सावन
मैं बरखा... तुम बादल
मैं दिल तुम... धड़कन
मैं फूल... तुम सुगंध
मैं रूप... तुम श्रृंगार
मैं मोह.. तुम काया
मैं धूप... तुम छाया
मैं अन्न... तुम मन
मैं पंत...तुम वसंत
मैं वीणा... तुम वाणी
मैं गंगा...तुम पानी
मैं शंख तुम बानी
मैं मृग तुम नयन
मैं राजा तुम रानी

