STORYMIRROR

Ervivek kumar Maurya

Romance Tragedy

3  

Ervivek kumar Maurya

Romance Tragedy

उनको ही खो आया हूँ

उनको ही खो आया हूँ

1 min
177

आज भी उनके जैसा हो नहीं पाया हूँ

उनको खोने के बाद खुद को नहीं पाया हूँ।

वो मुझे रोकते-रोकते रह गये

मैं उनसे बहुत दूर निकल आया हूँ।

उन्होंने कुछ न कहा मुझसे कभी

मैं नासमझ जो उनसे नजरें चुरा के आया हूँ।


उनकी शायद कोई कमी थी ही नहीं

खुद ही गलतियों की गठरी बना आया हूँ।

मेरा नसीब तुझसे जुड़ा क्यों नहीं

जो खाली हाथ ले के चला आया हूँ ।

किसी को खोने का दर्द 'हेमू' से पूछो

उन्हें पा के उनको ही खो आया हूँ ।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance