STORYMIRROR

Jai Singh(Jai)

Abstract

3  

Jai Singh(Jai)

Abstract

उमस ने बहुत सताया

उमस ने बहुत सताया

1 min
222

भविष्यवाणी ढह गई,खास नहीं बरसात

खूब तपाया घाम ने,भीग गया यो गात

भीग गया यो गात,उमस ने बहुत सताया

देखें चातक बाट ,बूंद पहली को पाया 

कहीं पडे ना बूंद ,कहीं पानी ही पानी

ठीक करो हालात,ढहे ना भविष्यवाणी।


 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract