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Shashikant Das

Abstract Romance

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Shashikant Das

Abstract Romance

उम्र प्रेम की !

उम्र प्रेम की !

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प्रेम के उम्र का संज्ञान लेना है मुश्किल, 

अक्ल से परे इसमें तो मिलते है दो दिल।


वृद्धावस्था में प्रेम संबध की कुछ अलग है पहचान, 

खट्टी मीठी नोख झोक संग देते है एक दूसरे को सम्मान।


ऋतुएं बदली और बदले वर्ष के दिनांक, 

रखी धरोहर में अपनी यादें बना के जैसे क्रमांक।


दो दिल की बातें न सिमटी केवल प्यार में, 

किया दूर अपने अकेलेपन को एक दूसरे के एतबार में।


शरीर में बल होने का न करे कभी पछतावा, 

दिल की कोठर में आज भी बह रही है प्रेम की लावा।


उम्र की दहलीज में भले ही हो चले हो बूढ़े, 

दुर्गुम राह पे आज भी एक दूसरे के लिए हैं खड़े।


दोस्तों,शरीर के सभी अंगो के समक्ष 

दिल तो बच्चा होता है,

वृद्धावस्था में भले मिले हो संसार भरा ज्ञान

फिर भी प्रेम तो कच्चा और सच्चा होता है।


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