STORYMIRROR

Shashikant Das

Abstract Inspirational

3  

Shashikant Das

Abstract Inspirational

नवरात्र 2024!

नवरात्र 2024!

1 min
143

असंख्य तारों के बीच निकली है ये अलौकिक भोर,

माता के दरबार में गूंज उठा है भक्तों का अद्भुत शोर,

कोमल हवाओं ने अपने वेग में डाला है अनोखा जोर,

बिन बारिश के झूम उठा है मन मानो बनके मोर। 


असुरों के अमानवीय प्रकोप को इस धरा ने खूब है झेला,

महिषासुर के संग युद्ध से लेकर वध तक थी उत्कृष्ट बेला,

सिंदूर और गुलाल सहित जीवों ने जश्न को खूब है खेला,

जगराता के दियों संग सज उठा है सितारों का मेला ।


मैया की ममता है मानो कभी ना रुकने वाली झरना,

दे दे माता हमको अपने मन में एक छोटा सा कोना,

ब्रह्माण्ड के अमूल्य धातुओं को बनाया है अपना गहना,

आपके निर्मल छाया तले हमें पापियों से क्या डरना ।


दोस्तों, माता के सभी रूपों से हो चुके हैं हम पूरे अवगत,

पवित्र भक्ति संग करते हैं अपने मन मंदिर में उनका स्वागत। 


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract