उम्र और वक्त
उम्र और वक्त
उम्र का मसला कुछ अजीब सा है,
कब कैसे गुज़र जाती है पता ही नहीं चलता,
छोटी छोटी बचपन की बातें,
वो किस्से और मुलाकातें,
अपने और पराए, जो दिल को भा जाएं,
बस वक्त का खास हिस्सा बन जाते,
वक्त गुज़रा, मौसम गुज़रे
हम भी जाने कहां से कहां हो लिए,
बचपन के सारे किस्से और मुलाकातें,
खुशनुमा बिताए वो लम्हें,
रख दिए थे अंदर किसी तिज़ोरी में,
आज निकल आए हैं फिर वो आंखों से,
बचपन के लोग, बचपन की वो यादें,
मासूम सी ज़िद, प्यारी सी बातें
गर्मी छुट्टियां, और वो गांव की गलियां
अपने लोग और सिर्फ अपना वक्त,
वक्त, जो गुज़र गया अब,
उम्र का मसला है, और वक्त का पहिया है,
कभी न रुकने वाला वक्त,
और कभी न भूलने वाली प्यारी यादें,
उम्र का मसला कुछ अजीब सा है।
