STORYMIRROR

Pandav Kumar

Abstract

2  

Pandav Kumar

Abstract

उम्मीद

उम्मीद

1 min
13

उल्काएं गिरती है तो गिरे

सिर्फ मेरा घर नहीं जलने वाला

यहां कोई खुदा नहीं आने वाला


दुख के साए में हम हैं

तो कल कोई और आएगा

मन्हुसियत सिर्फ मेरे हिस्से नहीं रहने वाला


आज खुश है वो देखकर 

कि मेरे हाथ दबे हैं,पर

वक़्त हमेशा एक नहीं रहने वाला


प्यास लगी हो तो उपाय ढूंढ़ो

यहां समंदर नहीं आने वाला

वक़्त का तकाज़ा तो देखो

यहां रेत भी निचोड़ा जाएगा!


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract