Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!
Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!

Pandav Kumar

Abstract


2  

Pandav Kumar

Abstract


उम्मीद

उम्मीद

1 min 0 1 min 0

उल्काएं गिरती है तो गिरे

सिर्फ मेरा घर नहीं जलने वाला

यहां कोई खुदा नहीं आने वाला


दुख के साए में हम हैं

तो कल कोई और आएगा

मन्हुसियत सिर्फ मेरे हिस्से नहीं रहने वाला


आज खुश है वो देखकर 

कि मेरे हाथ दबे हैं,पर

वक़्त हमेशा एक नहीं रहने वाला


प्यास लगी हो तो उपाय ढूंढ़ो

यहां समंदर नहीं आने वाला

वक़्त का तकाज़ा तो देखो

यहां रेत भी निचोड़ा जाएगा!


Rate this content
Log in

More hindi poem from Pandav Kumar

Similar hindi poem from Abstract