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अमित प्रेमशंकर

Abstract

4.5  

अमित प्रेमशंकर

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उग हो सूरज देव

उग हो सूरज देव

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उगऽ हो सूरज देव..भईले भिनसार हो कि...२

गंगा जी में परवैतिन ले के अरघा खाड हो अरऽ..२

उग हो सूरज देव...!


जागी गईलें सुगा मैना... जागले संसार हो कि...२

सहलो ना जाता अब तऽ दौरा के भार हो अर...२

उगऽ हो सूरज देव..भईले भिनसार हो कि

उग हो सूरज देव...!


कवने बाधा रहिया में..कईला कहवां देर हो कि....२

जल्दी हांकी रथवा के.. कईला काहे कुबेर हो अर

उगऽ हो सूरज देव..भईले भिनसार हो कि

उग हो सूरज देव...!


गह गह बजवे लगलै भैया चमरा ढोल हो कि...२

निंदिया से जागी देव..नैना अपना खोल हो अर...२

उगऽ हो सूरज देव..भईले भिनसार हो कि

उग हो सूरज देव...!


भैया अमित कईलें बाड़े राऊरे पुजनीया हो कि....२

करेले निहोरा अमन गाई के भजनिया अर..२

उगऽ हो सूरज देव..भईले भिनसार हो कि.

उग हो सूरज देव...!


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