तूफान
तूफान
दो-तीन दिन पहले से न्यूज़ में भयंकर तूफान आने की सूचना आ रही थी ।मैंने विवेक से पूछा-" यह तूफान तो समुद्र के रास्ते से आ रहा है न तो हमारे शहर पर तो इसका असर कम होगा न "?
विवेक ने कहा -"हाँ, असर तो कम होगा पर तुम घर में मोमबत्ती वगैरह रख लेना शायद बिजली चली जाएगी और तुम्हें तो पता ही है एक बार बिजली गयी तो तूफान थमने के बाद ही आएगी और हाँ, खाने पीने की चीजें भी देख लेना बाजार से कुछ लाना है तो मुझे बता देना शाम को मैं जा कर ले आऊँगा"। जैसे जैसे तूफान के आने का समय नजदीक आ रहा था टीवी रेडियो पर आने वाली खबरें भी तूफान की तरह ही भयानक रूप लेती जा रही थी। आखिर तूफान ने अपना रंग एक दिन पहले ही दिखाना शुरू कर दिया। शाम से ही तेज हवाओं के साथ मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। सुबह होते होते तूफान ने विकराल रूप धारण कर लिया। तेज आंधी के कारण खिड़की दरवाजे बंद होने के बावजूद भी उनसे आती सांय-सांय की आती आवाज डरावनी होने लगी। बिजली चली गई। सुबह का समय भी अंधेरे के कारण रात जैसा प्रतीत हो रहा था। निरंतर बहुत तेज बरसात के कारण वातावरण सुहावना हो गया था।असमय बरसात से तप्त धरती पशु पक्षी सब मानो झूम उठे। मेरा मन भी बरसात में भीगने के लिए मचल उठा पर तबीयत खराब होने के डर से मन की इच्छा मन में ही दबी रह गई। मुहल्ले के सब लोग अपने अपने घर के झरोखे से इस बारिश का मजा ले रहे थे। शाम में अचानक बहुत तेज "धड़ाम" की आवाज से सब अपनी अपनी बालकनी में निकल आए। मैंने पड़ोस में रहने वाली रीमा से इशारे से पूछा -"क्या हुआ है "?वह मुझे कुछ बता रही थी पर बरसात और तेज हवाओं के कारण उसकी बातें समझ में न आ रही थी। फिर उसने फोन की तरफ इशारा किया । मैंने फोन देखा तो उसका ही फोन आ रहा था ।मैंने उठाकर पूछा-" जल्दी बताओ, क्या हुआ है, इतने जोर की आवाज कहाँ से आ रही है"? उसने बताया- "दीदी,हमारी सोसाइटी में जो शर्मा जी रहते हैं उनका पूरा मकान ही गिर गया है। उनके पड़ोसी ने फायर ब्रिगेड को फोन कर दिया है और वह अब आ भी गए हैं"। शर्मा जी का पूरा परिवार सुरक्षित है न?- मैंने पूछा। पता नहीं दीदी, मैं तो बस इतना ही जानती हूँ। यह कह कर उसने फोन रख दिया। मन में आशंकाओं का तूफान बाहर के तूफान से भी तेज और डरावना होने लगा ।मैंने विवेक को पता लगाने के लिए कहा। वे छाता लेकर बाहर निकल पड़े। मैं बालकनी में खडी उनके आने का इंतजार करते हुए शर्मा जी के पूरे परिवार की सलामती की दुआ करने लगी। लगभग एक घंटे बाद विवेक को वापस आते देख मैं झट नीचे आ शर्मा जी के परिवार के बारे में पूछने लगी ।विवेक ने बताया-" डरने वाली कोई बात नहीं, शर्मा जी और उनका परिवार सुरक्षित है और यह सिर्फ माता जी की कृपा से हुआ है"। शर्मा जी के भाई को घर के गिरने की सूचना जैसे ही मिली वह तुरंत आए और उन्होंने ही बताया कि भैया भाभी पूरे परिवार के साथ अपने कुलदेवी के दर्शन के लिए तीन दिन पहले ही गांव चले गए थे ।जब घर गिरा उस समय घर में कोई नहीं था। घर तो फिर से बन जाएगा पर शर्मा जी का पूरा परिवार सुरक्षित है यह सुनकर मन को शांति मिली। सचमुच आज ईश्वर ने ही उन्हें इस दुर्घटना से बचा लिया था।
