STORYMIRROR

kishor zote

Abstract

2  

kishor zote

Abstract

तू उम्मीद की भोर

तू उम्मीद की भोर

1 min
484


तू उम्मीद की भोर


अपने ही संसार में

खोने लगते यार

खुद को भुला के

देख ले एक बार


मैं और सिर्फ मेरा

ऐसा हरदम मत कर

अंधेरा जब घना होता

मुट्ठी में कुछ जुगनू धर


अपने लिए तो जीते सब

मत बन तू जानवर

दे खुशियाँ किसी को

ऐसी मुस्कुराहट भर


बाहों में समा ले आसमान

ऐसी पकड़ ले तू डोर

किसी के लिए बना जा

तू उम्मीद की भोर




विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from kishor zote

सच

सच

1 min पढ़ें

आसमान

आसमान

1 min पढ़ें

अनमोल

अनमोल

1 min पढ़ें

आँसू

आँसू

1 min पढ़ें

याद

याद

1 min पढ़ें

शक

शक

1 min पढ़ें

Similar hindi poem from Abstract