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Khanak upadhyay

Inspirational

2.9  

Khanak upadhyay

Inspirational

तू बन शेरनी, तू दिखा दम...

तू बन शेरनी, तू दिखा दम...

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673


 स्त्री..

तू बन शेरनी, तू दिखा दम,

तू उठ अपने दुश्मनों को ललकार,

ये बता की जंगल में पेड़ से ज्यादा शेरनियाँ है,

तू एक बार घरबार छोड़ मैंदान में आ जा,

घर की Housewife से The challenger बन,

युद्ध में बेलन-चकलौटे से नहीं; अपने पंजो से हुंकार,

तू बन शेरनी, तू दिखा दम,

तू उठ अपने दुश्मनों को ललकार,

तू घायल हो सकती है, पर उससे ज्यादा ताकतवर भी,

तू खुद को पहचान, और एक नयी आवाज़ बन,

तू एक माँ है तो युद्ध में झाँसी की रानी बन,

स्त्री तू विशालकाय भावों का सागर है,

पर तू आज बाइक चलाने वाली नारी बन,

तू बन शेरनी, तू दिखा दम,

तू उठ अपने दुश्मनों को ललकार!


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