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GUDDU MUNERI "Sikandrabadi"

Romance

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GUDDU MUNERI "Sikandrabadi"

Romance

तू आती है जब मेरी गली

तू आती है जब मेरी गली

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तू आती है जब जब मेरी गली 

मैं तुझे देखकर दंग रह जाता हूँ 

मेरी तो नही तु पर है किसी ओर की

मैं यह देखकर दंग रह जाता हूँ 


अब हद बड़ गई तो 

कहीं ऐसा न हो कि 

आ बैल मुझे मार कहूँ


काश मेरे पास भी होती तू 

बस यही सोच कर जीती तू 

पर क्या करू ये दिल है

इसे समझा कर रह जाता हूँ 


अब हद बड़ गई तो 

कहीं ऐसा न हो कि 

आ बैल मुझे मार कहूँ


तुम किसी के साथ चलो 

इससे अच्छा मेरे साथ चलो 

तुम किसी की बाहों मे सही 

मेरी दिल की राहो मे सही 


अब हद बड़ गई तो 

कहीं ऐसा न हो कि 

आ बैल मुझे मार कहूँ


मैं तेरी मुस्कुराहट का दीवाना 

तू कहती है मेरा कोई और दीवाना 

होगा तेरा आशिक वो पुराना 

लेकिन हेर-फेर का है जमाना 


छोड़ चली आना तुम उसको 

मेरा नाम लेती जाना 

मेरा कहना मानता नही वो 

हमको तो सिर्फ तुझे ही पाना है 


अब हद बड़ गई तो 

कहीं ऐसा न हो कि 

आ बैल मुझे मार कहूँ।


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