STORYMIRROR

Rajubaldu Rajubaldu

Tragedy

3  

Rajubaldu Rajubaldu

Tragedy

तुम्हारी वो आखिरी बात

तुम्हारी वो आखिरी बात

1 min
103

लफ्ज़ फीके थे मगर जायका शायद तेरे लबो का था

मौन अदृश्य अक्षरों ने चीरा हवा को था मगर निशान मेरे जिस्म पे थे

जरिया जो बने रूह तलक जाने के

हां, वो तीर मुझे मेरी धड़कन में महसूस हुआ था

नशे का असर मेरे चहरे पर साफ था

समझने की तलब में दिमाग मेरा बेबस था

रहा में खड़ा तेरे सामने

मैं बेबस था

बिखर कर फर्श पर गिर रहा था

अपनी टूटी सहमी सांसों को समेट रहा था

मगर तेरी आखिरी बात को शायद मैं अब भी सुन रहा था!


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy