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Rajubaldu Rajubaldu

Inspirational Others

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Rajubaldu Rajubaldu

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मैं नारी हूँ

मैं नारी हूँ

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  मैं नारी हूँ, नित्य सी, स्वाभाविक सी, परछाई सी।

  मैं हूँ, तुम्हारे होने की सच्चाई सी ।।

  

  मैं ज्ञात हूँ, दिन रात के भेद सी।

  मैं अज्ञात हूँ, अनपढ़े संदेश सी।।


  मैं सहज हूँ, सावन की बरसात सी।

  मैं दुर्लभ हूँ, कोहिनूर जड़ित सौगात सी।।


  मैं शांत हूँ, सन्यासी के मन सी।

  मैं व्याकुल हूँ, तृष्णाओं से भरे तन सी।।


  मैं मैली हूँ, मोक्षदायिनी गंगा सी।

  मैं पवित्र हूँ, जगत जननी सीता सी।।


  मैं तेज हूँ, बाई लक्ष्मी की तलवार सी।

  मैं मंद हूँ, नौसिखिए की पतवार सी।।


  मैं मीठी हूँ, शादी की शहनाई सी।

  मैं कड़वी हूँ, बहना की विदाई सी।।


  मैं सतही हूँ, लड़खड़ाती रूबाई सी।

  मैं गहरी हूँ, मीरा की चौपाई सी।।


  मैं सुलझी हूँ, ममता मूर्त आई सी।

  मैं उलझी हूँ, नीड़ में तिनके की बुनाई सी।

 

  मैं नारी हूँ, नित्य सी, स्वाभाविक सी, परछाईं सी।

  मैं हूँ, तुम्हारे होने की सच्चाई सी।।

                             


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