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Neeraj pal

Inspirational

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Neeraj pal

Inspirational

तुम्हारे चरणों में

तुम्हारे चरणों में

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यह तन भी तेरा, मन भी तेरा, हे ! नाथ तुम्हारे चरणों में।

 भला हूँ, बुरा हूँ, जैसा भी हूँ, प्रणिपात तुम्हारे चरणों में।।


 तुमसे ही मिलन की आस जगी, छवि बसी है इन नैनन में।

 दर्पण में भी तुम ही दिखते,नित ध्यान धरूँ मैं चरणों में।।

 

भक्ति भाव की शक्ति नहीं, मल, आवरण भरा है हृदय में।

 श्रद्धा- विश्वास की भीख तुम दे दो, झोली फैलाऊँ चरणों में।।

 

मैं नालायक यह क्या जानूँ, सम रस हो तुम सबके मन में।

प्रेम का भूखा मैं अज्ञानी, नतमस्तक हूँ तुम्हारे चरणों में।।


अंधकार युक्त बना ये जीवन, कैसे प्रकाश फैलाँऊ जन-जन में।

अहंकार रूपी इस काया को, बस रहने दो अपने चरणों में।।


भरोसा न तुम्हारा जीत सका, फिर भी क्यों आते हो सपनों में।

इस दरबार की शान निराली है, पापी भी तर जाते इन चरणों में।।


याद तेरी सदा बनी रहे, जब तलक प्राण रहे इस तन-मन में।

" नीरज" पर इतनी दया तो करना, अंतिम घड़ी हो तुम्हारे चरणों में।।



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