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Manu Sweta

Romance

4  

Manu Sweta

Romance

तुम

तुम

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तुम प्राण मेरे

श्रृंगार मेरे

तुम प्रीत मेरी

तुम रीत मेरी,

तुम हास मेरे

परिहास मेरे,

तुम गीत मेरे

संगीत मेरे,

तुम सुर लय

और ताल मेरे,

तुम अहसास मेरे

विश्वास मेरे,

तुम दूर मेरे

तुम पास मेरे,

तुम ख्वाब मेरे

अरमान मेरे,

तुम धरती

आकाश मेरे,

मै नदिया तेरी

तुम सागर मेरे,

तुम चमन मेरे

तुम अमन मेरे,

तुम पुरुष मेरे

तुम पौरुष मेरे,

तुम चाँद मेरे

तुम सूरज मेरे,

तुम मीत मेरे

मनमीत मेरे,

तुम ह्रदय मेरे

स्पंदन मेरे,

तुम ही हो

सरताज़ मेरे,

श्वेता की हर

स्वांस स्वांस में

बसते हो बनकर

प्राण मेरे।।।



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