STORYMIRROR

Manjul Manzar Lucknowi

Abstract

3  

Manjul Manzar Lucknowi

Abstract

तुम तो ठहरी परी आसमानी

तुम तो ठहरी परी आसमानी

1 min
491

तुम तो ठहरी परी आसमानी

है ज़मीं पर हमारी कहानी।


छोड़कर जिस्म लो आ रही है,

रूह भी है तुम्हारी दीवानी।


इश्क़ में मिट भी जाएंगे हम तो,

याद रक्खेगी दुनिया कहानी।


नफ़रतें बाँटने वाले सारे,

होएँगे शर्म से पानी पानी।


आने वाले समय में दीवाने,

ढूंढ लेंगे हमारी निशानी।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract