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Vaibhav Dubey

Abstract

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Vaibhav Dubey

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तुम जैसे कितने आये

तुम जैसे कितने आये

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राजशाही चली गई सब नौकर-चाकर चले गए

ठोकर देने आये थे वो मुंह की खाकर चले गए


आजमा लो दांव तुम्हारे भी उल्टे पड़ जाएंगे

मुझे मिटाने तुम जैसे कई आये आकर चले गए।


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