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Garima Maurya

Tragedy

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Garima Maurya

Tragedy

टूट चुका

टूट चुका

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टूट चूका हूँ बिखरना बाकी है,

बचे कुछ एहसास जिनका जाना बाकी है,

चंद सांसें है जिनका आना बाकी है,

मौत रोज मेरे सिरहाने खड़ी हो पूछती है

भाई आ जा, अब क्या देखना बाकी है I"


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