STORYMIRROR

Garima Maurya

Abstract Horror Crime

2  

Garima Maurya

Abstract Horror Crime

टूटना

टूटना

1 min
194

टूट चूका हूँ बिखरना बाकी है,

बचे कुछ एहसास जिनका जाना बाकी है,


चंद सांसें है जिनका आना बाकी है,

मौत रोज मेरे सिरहाने खड़ी हो पूछती है


भाई आ जा, अब क्या देखना बाकी है I


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract