टैक्नोलॉजी और जीवन
टैक्नोलॉजी और जीवन
टैक्नोलॉजी ने जीवन को
कितना बदल दिया।
सुबह से रात तक के काम को,
कितना सरल कर दिया।
जिंदगी गैस से,
खाना पकाती है।
माईक्रो-इंडक्शन से,
पल में खाना गरम कर जाती है।
अगर न होती टैक्नोलॉजी
जिंदगी उपले थापती।
जंगल से लकडियां लाती।
मुश्किलों से आग जलाती।
घंटों बैठकर,फिर खाना पकाती।
टैक्नोलॉजी ने जीवन को,
कितना बदल दिया।
पानी-बिजली घर- घर आ गया।
जिंदगी में, रंग भरने
रेडियो- टीवी -सिनेमा आ गया।
चक्की पीसती थी जो जिंदगी,
टैक्नोलॉजी से,
वहीं आटा थैली में आ गया।
पैदल चलते पांवों को,
टैक्नोलॉजी ने पहिया लगा दिया।
हाथों की मथनी,
मसालों की कूटन को,
ग्राईंडर ने सांस दिला दिया।
टैक्नोलॉजी ने जीवन को,
कितना सरल कर दिया।
सुबह से लेकर शाम तक के,
काम को सरल कर दिया।
जिंदगी तकनीक से,
कितनी तेज भागी।
चौबीस घंटों को भी,
जिंदगी के लिए,
कम करा दिया।
जिंदगी मशीन हो गई।
आसपास वालों ने,
यह महसूस करा दिया।
हर इंसान को
हालात से
लड़ता हुआ
रोबोट बना दिया
टैक्नोलॉजी ने जीवन को,
कितना बदल दिया।
मशीनें काम करती रही,
इंसान के साथ -साथ,
और काम इतना बढ़ा दिया।
दिल और दिमाग को,
क्या कहें,
जिंदगी पर,
प्रश्नचिन्ह ?
थमा दिया।
टैक्नोलॉजी ने जीवन को,
कितना बदल दिया।
सुबह से शाम तक के काम को,
कितना सरल कर दिया।
खुद से लड़ते -लड़ते,
हाथ में स्मार्ट फोन आ गया।
किसे जा के कहता,
इंसान दिल की बात,
जिंदगी के सवालों पर,
मल्टीपल च्वाइस छा गया।
टैक्नोलॉजी ने हाथों को,
सरलता तो दी।
लेकिन दिलोदिमाग में,
जटिलता का घर कर गया।
