तस्वीर
तस्वीर
तेरी तस्वीर ने भी अब बात करना बंद कर दिया है
रोज़ दिन में तुमसे मुलाकात होती थी तस्वीर के बहाने
लेकिन उन मुलाकातों ने भी अब होना बंद कर दिया है
और राते कटती थी तुम्हारे ख्वाबों की सोहबत में (तस्वीर)।
लेकिन उन ख़्वाबों वाली रातों ने भी आना बंद कर दिया है
एहसास उस इश्क़ का जब गले से लगाता उस तस्वीर को
उस एहसास ने भी एहसान करना बंद कर दिया है
न जाने क्यों।
जब भी देखता था तस्वीर तो मिलती थी हमारे इश्क़ की कहानियां
लेकिन उन कहानियों की निशानियों ने भी दिखना बंद कर दिया है
ज़ोर से बहते थे जो रुख़सारों पर तस्वीर को देखकर तुम्हारी
अब उन अश्कों ने भी तहलका मचाना बंद कर दिया है।
अजीब सी सुकून खामोशी थी जब मिलता था तस्वीर से तुम्हारी
लेकिन अब उस खामोशी ने आगोश में लेना बंद कर दिया है
न जाने क्यों।
तस्वीर में न जाने क्यों लगती अजीब सी मुस्कुराहट है
मन में अजीब सी घबराहट है, बदन में अजीब सी सरसराहट है
इश्क़ तो तुम्हारी तस्वीर से भी कर लेंगे, बस यह बता दो
तुम ठीक तो हो न, तुम ठीक तो हो न ?

