STORYMIRROR

Prem Kumar Shaw

Abstract

4  

Prem Kumar Shaw

Abstract

तस्वीर

तस्वीर

1 min
456

प्रेम,

जिसमें मैं 

असफल हो चुका हूँ

उनके लिए लिखी गई

कविताएँ अब डायरी के

पन्नों में तस्वीर बन जाएंगी


और समय-असमय

उनसे मेरी निगाहें मिलेंगी,

कभी-कभी उनके

अंदर छिपे अर्थों से भी 

मुलाकात हो जाएंगी,


पर वें अर्थ तब 

कमजोर पड़ गये होंगे

इन बीतते दिनों के साथ

जो तस्वीर बनने से 

पहले थी।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract