STORYMIRROR

Prem Kumar Shaw

Abstract

3  

Prem Kumar Shaw

Abstract

आँखें

आँखें

1 min
273

एक खुली आस्माँ है

आसमाँ में पूरा जहाँ है


उस जहाँ को देखती है

मेरी एक जोड़ी आँखें


और अपने अनुसार 

एक आकार,एक रूप,

एक जगह बना लेती है ठहरने की।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract