STORYMIRROR

Shailaja Bhattad

Abstract

2  

Shailaja Bhattad

Abstract

तसल्ली

तसल्ली

1 min
121

जिंदगी अगर मनमुटाव कर बैठी हो

 अपनों के सहलाने से भी ना संभलती हो

 तब वक्त के हाथों सौंप देना ही समझदारी है

 तसल्लियों भरी दवा भी इस वक्त

 सिर्फ नाकामयाबी है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract