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गुलशन खम्हारी प्रद्युम्न

Inspirational

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गुलशन खम्हारी प्रद्युम्न

Inspirational

त्रिभंगी छंद...

त्रिभंगी छंद...

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त्रिभंगी छंद (244,44,44,42)

जय जय गणनायक,

      सुख के दायक,सेवा से हो,कष्ट परे ।

हे नित निर्णायक,

      सत के गायक, पुण्य रहे अब ,पाप मरे ।।

तुम ही संहारक,

     भक्तन तारक,सुमिरन करके,कष्ट हरे ।

तुम पूजन लायक,

      नित प्रतिपालक,जय-जय-जय प्रभु,गान करे ।।

जय अतुलित बलवन्,

   हिय आह्लादन,मारुत प्रचलन,हे स्वामी ।

हो नित अनुशीलन,

   उर उद्वेलन,सत संचालन,दो हामी ।।

कर मम प्रतिपालन,

   हो वह लालन,सत्य प्रक्षालन,तुम नामी ।

मति महती मचलन,

   नौका चालन,करती दोलन,पथ गामी ।।

ज्यों पतझड़ सावन,

   अंतिम निरसन,जीवन हो अब,निष्कामी ।

हो हिय अतिभावन,

   सम वृंदावन,दे‌ दो सत्पथ,आगामी ।।

द्यौ जैसे पावन,

   नव सुत यौवन, लक्षित यापन,आयामी ।

शुभ मन का धावन,

   जीकर जीवन,जा रे नभचर,उड़ व्योमी ।।


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