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Ratna Kaul Bhardwaj

Abstract

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Ratna Kaul Bhardwaj

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तलाश उस एक छोर की

तलाश उस एक छोर की

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एक मायूस चेहरा

बेसुध सी नाव की भांति

जिंदगी के तूफान में

गोते खाते हुए

अचानक रात के अंधेरों में

उजाले की किरण खोजने,

हर दर ओ दीवार पर

दस्तक देकर आगे बढ़ता है।

चेहरे की चमक ऐसी

जैसे राख के ढेर में नीली खाई।

चारों और दालान

फिर भी विश्वास लिए

अंतहीन रात की तरह

वह अनंत की तरफ 

खिंचता जाता है।


कितनी ही टूटी हुई आत्माएं

बाहर निकलकर उसे

छूने की कोशिश करती है

पर न जाने कौन सी दैवीय शक्ति

उसके लक्ष्य को

प्रज्जवलित करने के लिए

ब्रह्मांड के विभिन्न रूपों को

उसके सामने उज्जवलित करती है।


एक नग्न त्वचा,

हरी घास को छूते हुए नंगे पैर

घुटनों के बल बैठ कर

चिंतन में डूबी है।

लाल आंखें, आक्रोश से भरी नही

सुंदरता की प्रतिमा भी नही

बस प्रश्नों का एक जंजाल

जो उज्जवल भविष्य के लिए

उस एक छोर को तलाश रही है

जहां उसकी अपनी पहचान

आरंभ होती है

और यह तलाश जारी है

जब तक ब्रह्मांड की प्रमुख

छायाओं को एक सूत्र में

बांधने का लक्ष्य पूरा न हो......



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