तलाश है
तलाश है
अनजान शहरमें अजनबी हूं मै,
मुझे पहेचानने वाले लोंगो नहीं मगर,
मुझे दीलसे दील मिलाने वालों की तलाश है।
शहर की गलियोंमें भटक रहा हूं मै,
मुझे बेवकाई करने वालों की नहीं मगर,
मुझे वफादारी निभानें वालों की तलाश है।
शहर के तमाम घरों पर अटकता हूं मै,.
मुझे कातिल नज़र वालों की नहीं मगर,
मुझे नैनोंके आयनेमें बसाने वालों की तलाश है।
शहर के हर मोहल्लेमें घूम चूका हूं मैं,
मुझे हैवानियत आचरने वालों की नहीं "मुरली",
मानवता की धारा बहाने वालों की तलाश है।
