Prachi Beeka
Inspirational
यूं तो हर गम में टूट कर बिखर जाते है।
अगर रखे थोड़ा सबर तो फिर सँवर जाते हैंं।।
जीवन है तो सुख दुख आना ही है।
ऐसे ही हर कष्ट को गुजर जाना ही है।।
Ghat ki sham
जीवन एक राख
अपनी पहचान की...
प्रेम कथा
वक्त को करीब ...
अजन्मी प्रेम ...
थोड़ा दूर हो ...
थोड़ा सबर
डरने की क्या ...
जिंदगी
देवालय में बैठा बैठा मैं मन में करता ध्यान। शुभ दिन आया मैं करूँ दीप कौन सा दान। देवालय में बैठा बैठा मैं मन में करता ध्यान। शुभ दिन आया मैं करूँ दीप कौन सा द...
सफलता की एक ऐसी कहानी ये, जिसने बदला नज़रिया। सफलता की एक ऐसी कहानी ये, जिसने बदला नज़रिया।
कुकर की सीटी में वे दबाती गईं सिसकियां ! कुकर की सीटी में वे दबाती गईं सिसकियां !
अमर रहेगी गोरा बादल की कहानी बोल रही मिट्टी राजस्थानी अमर रहेगी गोरा बादल की कहानी बोल रही मिट्टी राजस्थानी
इंद्रधनुष देखकर मेरे मन में सदा, एक ही ख्याल आता है! इंद्रधनुष देखकर मेरे मन में सदा, एक ही ख्याल आता है!
पुकार ले कोई जो पीछे से, तो रुक जाएं ये कदम. पुकार ले कोई जो पीछे से, तो रुक जाएं ये कदम.
उसकी फ़ितरत इंसानों से अलग है, वो आख़िरी साँस तक साथ निभाऐगी।हाँ सच ही तो, याद ही तो मेरी जागीर है।.... उसकी फ़ितरत इंसानों से अलग है, वो आख़िरी साँस तक साथ निभाऐगी।हाँ सच ही तो, याद ह...
वे तो उठाते रहेंगे उंगलियां हर रोज नई उंगलियां...... वे तो उठाते रहेंगे उंगलियां हर रोज नई उंगलियां......
प्रसन्नचित्त,परमानंद में लिप्त, बावरा-सा मन लिए फूल हूं मैं। प्रसन्नचित्त,परमानंद में लिप्त, बावरा-सा मन लिए फूल हूं मैं।
जिससे मिले किसी को प्ररेणा वो सच मे है, असल कविता, शब्द। जिससे मिले किसी को प्ररेणा वो सच मे है, असल कविता, शब्द।
ऐसा प्रेम मधुर हो जिसको, याद करे यह दुनिया सारी। ऐसा प्रेम मधुर हो जिसको, याद करे यह दुनिया सारी।
समाज की जलती सोच का आलिंगन कर, मैं चल पड़ा हूँ बेफिक्र, इस जीवन पथ पर। समाज की जलती सोच का आलिंगन कर, मैं चल पड़ा हूँ बेफिक्र, इस जीवन पथ पर।
अहिल्याबाई का सुदृढ़ व्यक्तित्व, उनकी जीवन गाथा। अहिल्याबाई का सुदृढ़ व्यक्तित्व, उनकी जीवन गाथा।
बैर और नफरत की दीवार को, मिलकर मिटटी में मिलाते हैं चलो इस जनवरी, जन जन को जगाते हैं. बैर और नफरत की दीवार को, मिलकर मिटटी में मिलाते हैं चलो इस जनवरी, जन जन को...
किसी एक की कुर्बानी से देश नहीं आज़ाद हुआ मिटे अनगिनत देश की खातिर तब जाकर आज़ाद हुआ। किसी एक की कुर्बानी से देश नहीं आज़ाद हुआ मिटे अनगिनत देश की खातिर तब जाकर आज़ा...
ये सूना पड़ा हुआ घर, घर का खाली पड़ा अहाता। ये सूना पड़ा हुआ घर, घर का खाली पड़ा अहाता।
पहिये की भांति वक्त, चलता रहता है, झुकाता है जग को,स्वयं नहीं झुकता है। पहिये की भांति वक्त, चलता रहता है, झुकाता है जग को,स्वयं नहीं झुकता है।
मुझे विद्युत संचालित दाह गया गृह में जला आना इस प्रकार बचा लेना एक वृक्ष। मुझे विद्युत संचालित दाह गया गृह में जला आना इस प्रकार बचा लेना एक वृक्ष।
गूँज रहा है यूँ तो गुलशन , आजादी के नारों से। गूँज रहा है यूँ तो गुलशन , आजादी के नारों से।
मां बाप का पूजन करें हम श्रद्धा के साथ इसी तरह से पेड़ को सींचे अपने हाथ। मां बाप का पूजन करें हम श्रद्धा के साथ इसी तरह से पेड़ को सींचे अपने हाथ।