STORYMIRROR

Prachi Beeka

Abstract

3  

Prachi Beeka

Abstract

वक्त को करीब से देखा है

वक्त को करीब से देखा है

1 min
97

मेने बुरे वक्त को करीब से देखा है ।

सूरज को उगने से पहले डूबते हुए देखा है।

हस्ते हुए चहरे के पीछे दिल टूटते हुए देखा है।

जिम्मेदारियों में सपनो को छूटते हुए देखा है।

जनाब मेने बुरे वक्त को करीब से देखा है।


बुरे वक्त ने ये बताया है

ना ही कोई अपना और ना ही कोई पराया है।

ये सब इस जीवन की मोह माया है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract