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Meenaz Vasaya. "મૌસમી"

Inspirational

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Meenaz Vasaya. "મૌસમી"

Inspirational

"तेरी फितरत समझ में नहीं आती"

"तेरी फितरत समझ में नहीं आती"

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ए जिंदगी तेरी फितरत मुझे कभी समझ में ना आई,

कभी तू शिखर पे ले जाती है कभी दिखाती है खाई।

ए जिंदगी तू गणित की जैसी कठिन है,

कुछ जोड़ने जाती हूँ, तू तोड़ देती है,

तू कितनी जिद्दी है।

जहां सुख की आशाएं रखते हैं हम,

वहाँ पे दुख की पोटली थमा देती है तू।

जहां जीत की उम्मीद रखते है हम,

वहाँ पे हरा देती है हमें तू।

जहां शागिर्द बनना होता है हमें,

वहाँ तू उस्ताद बना देती है हमें।

जब हारने की कगार पर होते हैं हम,

तब आसमां की बुलंदियों तक ले जाती है तू।

ए जिंदगी तेरी फितरत मुझे समझ में नहीं आती,

दोस्त को दुश्मन बनाती हो, फिर दुश्मन के दिल में प्यार जगाती हो।

ए जिंदगी तेरी फितरत मुझे समझ में नहीं आती,

तेरी ऐसी अदा से में सदा उलझी उलझी रहती हूँ।



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