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दयाल शरण

Abstract

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दयाल शरण

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तार्रुफ़

तार्रुफ़

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खुद से मिलाने आज

आपको लिए चलते हैं

आईना दिखाने आज

आपको लिए चलते हैं!


जुगनुओं को खोजती

अंधेरे में एक जोड़ी आंखे

तलाश आपकी लीजिये

आज ख़त्म करते हैं!


सवाल इतने कि पन्ने

पड़ गए कमती

छोड़िए इनको फिर

सिफर से सफर करते हैं!


आसमां ऊंचा था

हाथ ज़रा छोटे थे

घर की दीवार सही

हसरतों से रँगते हैं!


मन की ध्वनि तरंगों पे

अंगुलियां यदि थिरकेंगी

सृजन के नव पृष्ठ की 

आधारशिला रखते हैं!


खुद से मिलाने आज

आपको लिए चलते हैं

घर की दीवार सही

हसरतों से रँगते हैं!



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