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Nilofar Farooqui Tauseef

Abstract

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Nilofar Farooqui Tauseef

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स्याही

स्याही

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पूछ जो लिया काग़ज़ ने,

मेरे लिखने का वजूद


स्याही ने बिखर कर

मेरी दास्ताँ सुना दी


हर पन्ने पे जो बिखर गई

स्याही के निशान


ज़ख़्म कितने गहरे थे,

ये बात बता दी।


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