स्वर्ग से बढ़कर धरा हो जाएगी
स्वर्ग से बढ़कर धरा हो जाएगी
प्यार का मजहब चलाना चाहिए।
दीप घर-घर में जलाना चाहिए।।
वेदना की रात ढोती बस्तियाँ,
भोर का सूरज उगाना चाहिए।
भूख- महँगाई- गरीबी का शजर,
काटकर जड़ से मिटाना चाहिए।
राह रोके जो खड़े हैं राहजन,
रहबरी उनको सिखाना चाहिए।
फिर कहीं नानक कहीं रसखान हों,
सूर तुलसी का जमाना चाहिए।
ईद का हो जश्न या होली-दीवाली,
साथ मिलजुल कर मनाना चाहिए।
मुल्क का हर नागरिक इंसान है ,
भेद ये सबको बताना चाहिए।
स्वर्ग से बढ़कर धरा हो जाएगी,
अश्क हर आँखों में आना चाहिए।
