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Rekha gupta

Inspirational

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Rekha gupta

Inspirational

स्वप्न

स्वप्न

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मैं पलकों में रात काटती चली,

आंखों में ढेरों स्वप्न संजो चली।

पूर्ण करने की चाह लिए,

उड़ती गई हो मैं बावरी।


उजालों से भी चुभन ले चली,

काली घटाओं से भी न डरी।

घुटन से टूटती जुड़ती रही,

नियति को भी ठेंगा दिखा चली।


दिल पर हजारों जख्म ले चली,

गम की आंधियों से भी न हिली।

आत्मविश्वास मन में संजोती रही,

हर उलझन का सामना करती रही।


अपमान का घूंट पीती रही,

हर दर्द मे खुशी ढूंढती रही।

रस्मों की डोर से बंधी रही,

फिर भी उड़ान अपनी भरती रही।


मैं पलकों में रात काटती चली,

आंखों में ढेरों स्वप्न संजो चली।

पूर्ण करने की चाह लिए,

उड़ती रही हो मैं बावरी।


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