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Sangeeta Ashok Kothari

Inspirational

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Sangeeta Ashok Kothari

Inspirational

स्वार्थ की पराकाष्ठा"

स्वार्थ की पराकाष्ठा"

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धरती पर बसते असंख्य जीव पर मानव हैं सबसे स्वार्थी,

अपनों को ही बेच दें मानव इतना निष्ठुर एवं मतलबी।


ना पचा पाता मानव एक-दूसरे मानव की कामयाबी,

यदि वो ऊँचाई पर खड़ा हो तो टाँगे खींच लेते उसकी।


यहाँ एक दूसरे को गिराने में लगा पड़ा है इंसां हर कोई,

क्योंकि किसी की प्रसिद्धि सहन नहीं कर पाता कोई।


उदाहरणार्थ शाखाएं तोड़ रहे मानव उसी शज़र की,

जिस पर बैठें बैठें वो जान लेना चाहते एक दूसरे की।


एक दूसरे को नीचा दिखाना यही फ़ितरत हैं सबकी,

जैसे जो पेड़ सभी छाया देगा उसी को काट रहें सभी।।



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