"स्वामी विवेकानंद सुगन्ध"
"स्वामी विवेकानंद सुगन्ध"
भारत मे फैलायी थी,सर्वत्र ज्ञान की सुगंध
ऐसे ब्रह्मज्ञानी मनस्वी थे,स्वामी विवेकानंद
उन्होंने ही चलाया था,गुरु रामकृष्ण मिशन
जिसका पवित्र,निर्मल ज्ञान से था,सम्बन्ध
स्वामी विवेकानंद जी सिद्ध योगी थे,स्वछंद
शिकागो धरती में फहराया था,हिंद परचम
बचपन का आपका नाम था जी,श्री नरेंद्र
गुरु थे आपके जी,श्री रामकृष्ण-परमहंस
कश्मीर से कन्याकुमार तक सर्वत्र ही हिंद
गुरु के आशीर्वाद से बने,आप विवेकानंद
फैली है,बस स्वामीजी आपकी ही सुगन्ध
आजीवन ब्रह्मचारी रहे,आप विवेकानंद
योग-साधना और सादगी की आप थे,तरंग
भीतर आपके तो भरा हुआ था,ज्ञान अनन्त
दुर्भाग्य से बेवक्त चले गये,आप विवेकानंद
नही तो ओर ज्यादा छूता,हमारा देश गगन
आपका जन्मदिन ऐसे मनाता है,हमारा हिंद
सबको मिलती कैरियर शिक्षा,आज के दिन
12 जनवरी कैरियर डे की फैलती है,सुगंध
आपको शत शत वंदन,नमन,श्री विवेकानंद
आप सदा दिलों में जिंदा रहोगे,विवेकानंद
आपकी शिक्षा सदैव ही याद रखेगा,हिंद
उठो,जागो,और चलते रहो,होकर तुम बुलंद
तक न रुको,जब तक न मिले मंजिल सुरंग
हिना भी तब रचती ओर देती खूबसूरत रंग
जब वो लड़ती है,दुष्ट दुनिया से अपनी जंग।
