RAKESH KUMAR YADAV
Inspirational
देव संस्कृति का जिसनें, किया जगत उत्थान।
विश्व सदा ही कर रहा, उस रिषि का गुणगान।।
उठो,जगो, आगे बढ़ो, होवै जीवन साध्य।
निकले मुख से शब्द ये, जग में हुआ महान।।
।। माँ ।।
स्वामी विवेका...
देश भक्ति
देश भक्ति ( स...
हिन्दी दिवस प...
शिक्षक दिवस प...
कुंडलियाँ
सब एक दूसरे को बधाई दे रहे हैं जैसे कि हमने विश्व विजय कर ली हो। सब एक दूसरे को बधाई दे रहे हैं जैसे कि हमने विश्व विजय कर ली हो।
सरफ़रोशी की तमन्ना लिए फिरते हैं देश प्रेम में सैनिक हमारे मतवाले। सरफ़रोशी की तमन्ना लिए फिरते हैं देश प्रेम में सैनिक हमारे मतवाले।
इस 'विजय श्री 'के लिए कितनों ने लड़ी मिलकर हमारे साथ लड़ाई है इस 'विजय श्री 'के लिए कितनों ने लड़ी मिलकर हमारे साथ लड़ाई है
है धरती का अस्तित्व जितना पुराना पुराना उतना ही हमारा इतिहास है. है धरती का अस्तित्व जितना पुराना पुराना उतना ही हमारा इतिहास है.
वह वतन के वफादार हैं मेरी सांसे जिनकी कर्जदार है। वह वतन के वफादार हैं मेरी सांसे जिनकी कर्जदार है।
"स्वतंत्रता मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है।" क्या सच में हुआ यह सपना साकार है. "स्वतंत्रता मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है।" क्या सच में हुआ यह सपना साकार है.
हमारा ये देश कोई आम देश नहीं शायद कोई जादू की पुड़िया है । हमारा ये देश कोई आम देश नहीं शायद कोई जादू की पुड़िया है ।
जय जवान जय किसान का,नारा यहां पर गूंजता है। जय जवान जय किसान का,नारा यहां पर गूंजता है।
दादी नानियों का बतकही मंडल , इक होता खाँसती-खुरखुराती कहानी का जंगल ...इक होता दादी नानियों का बतकही मंडल , इक होता खाँसती-खुरखुराती कहानी का जंगल ...इक होत...
हे वीर तेरी अमर प्रेम कहानी जिसकी ना कोई सानी। हे वीर तेरी अमर प्रेम कहानी जिसकी ना कोई सानी।
ग़ुबार न रखना जमा दिल में राहबर, कूचे से गुज़रने का सबब मिट जाएगा वहीं। ग़ुबार न रखना जमा दिल में राहबर, कूचे से गुज़रने का सबब मिट जाएगा वहीं।
जिनकी पूर्वजों के प्रति होती है श्रद्धा अगाध वही लोग इस झूठी दुनिया में मनाते है, जिनकी पूर्वजों के प्रति होती है श्रद्धा अगाध वही लोग इस झूठी दुनिया में मनाते ह...
वीर रस से सींची यह कविता जो गाती आज़ादी की वाणी है. वीर रस से सींची यह कविता जो गाती आज़ादी की वाणी है.
उन सपनों को बुनकर हकीकत में खुद को तू पहचान जरा उन सपनों को बुनकर हकीकत में खुद को तू पहचान जरा
घर के बुजुर्गों को कोई देख न पाए, भड़कते हैं दर बदर बन के असहाय, घर के बुजुर्गों को कोई देख न पाए, भड़कते हैं दर बदर बन के असहाय,
अरुणोदय पर लगा प्रश्न चिन्ह भ्रष्टाचार और गरीबी की सुबह आई अरुणोदय पर लगा प्रश्न चिन्ह भ्रष्टाचार और गरीबी की सुबह आई
पैर क़ब्र में लटके हों तब भी दिल मचलता है इश्क वो अहसास है जो हर उम्र में झलकता है। पैर क़ब्र में लटके हों तब भी दिल मचलता है इश्क वो अहसास है जो हर उम्र में झल...
छोड़कर मैं अपने माँ बाप का घर संवारने आ गयी मैं आप का घर. छोड़कर मैं अपने माँ बाप का घर संवारने आ गयी मैं आप का घर.
तू ही है अस्तित्व हमारा तू ही है पहचान तेरे खातिर सब लुटा दे आंखें न हों नम तू ही है अस्तित्व हमारा तू ही है पहचान तेरे खातिर सब लुटा दे आंखें न हो...
अपने जीवन का अक्षर बन खुद मुझको वाक्य बनाने दो अपने जीवन का अक्षर बन खुद मुझको वाक्य बनाने दो