RAKESH KUMAR YADAV
Inspirational
देव संस्कृति का जिसनें, किया जगत उत्थान।
विश्व सदा ही कर रहा, उस रिषि का गुणगान।।
उठो,जगो, आगे बढ़ो, होवै जीवन साध्य।
निकले मुख से शब्द ये, जग में हुआ महान।।
।। माँ ।।
स्वामी विवेका...
देश भक्ति
देश भक्ति ( स...
हिन्दी दिवस प...
शिक्षक दिवस प...
कुंडलियाँ
झूठ के कफ़न से अपने सिर को ज़रा ढक लो तुम झूठ के कफ़न से अपने सिर को ज़रा ढक लो तुम
जीवन सकारात्मक संभावनाओं से भरा हो जीवन सकारात्मक संभावनाओं से भरा हो
ज़रा देखो इस नज़ारे को, सब कुछ ठहरा हुआ, ये जल, ये आकाश, और ये धरा भी। ज़रा देखो इस नज़ारे को, सब कुछ ठहरा हुआ, ये जल, ये आकाश, और ये धरा ...
तप्त- रेणु पर चलते- चलते कुछ विश्वास रहेंगे अविचल। तप्त- रेणु पर चलते- चलते कुछ विश्वास रहेंगे अविचल।
कल क्या होगा यही सोच मेरे मन में थी, विपदा से घिरी दर्द तीव्रतम तन में थी. कल क्या होगा यही सोच मेरे मन में थी, विपदा से घिरी दर्द तीव्रतम तन में थी.
लिए एक मधुर मुस्कान, और उस मुस्कान में छिपा होता है एक तूफान। लिए एक मधुर मुस्कान, और उस मुस्कान में छिपा होता है एक तूफान।
कुल्हाड़ी से वार न करो देखो मुझपे प्रहार न करो. कुल्हाड़ी से वार न करो देखो मुझपे प्रहार न करो.
भाग रहा हूँ, मंजिल की तलब है. भाग रहा हूँ, मंजिल की तलब है.
लेकिन तुम बिना किसी डर के पूरी हिम्मत से लड़ना जानते हो लेकिन तुम बिना किसी डर के पूरी हिम्मत से लड़ना जानते हो
नव वर्ष की बेला है। जनमानस में वही उमंग ,उल्लास और अभिलाषा है । नव वर्ष की बेला है। जनमानस में वही उमंग ,उल्लास और अभिलाषा है ।
प्रकृति में भी ईश्वर निवास करता है ये जीवन में उतार लें। प्रकृति में भी ईश्वर निवास करता है ये जीवन में उतार लें।
बनना ऐसे, जिसमे तटस्थ लहरें हो जीतेगा, तू जब भीतर शांत लहरें हो। बनना ऐसे, जिसमे तटस्थ लहरें हो जीतेगा, तू जब भीतर शांत लहरें हो।
आओ इन अनचिन्हें रास्ते पर पाँव धरते हैं। आओ इन अनचिन्हें रास्ते पर पाँव धरते हैं।
शुरू हुआ जो युद्ध तीन दिसंबर उन्नीस सौ इकहत्तर को। शुरू हुआ जो युद्ध तीन दिसंबर उन्नीस सौ इकहत्तर को।
हां !थोडा़ अफसोस तो है कि नहीं बनाईं पगडंडियां मेेरे लिए किसी ने। हां !थोडा़ अफसोस तो है कि नहीं बनाईं पगडंडियां मेेरे लिए किसी ने।
सोच सोच कर जब सोचा जाए यह सोच भी अनोखी चीज। सोच सोच कर जब सोचा जाए यह सोच भी अनोखी चीज।
अटल के अटल आदर्शों को आचरण बनाना होगा। अटल के अटल आदर्शों को आचरण बनाना होगा।
ख़ुद भी जागें औरों को जगाएं। नशामुक्ति अभियान चलाएं। ख़ुद भी जागें औरों को जगाएं। नशामुक्ति अभियान चलाएं।
जो न रखते है, सब्र भीतर पिंजरे में रोते है, वो नर जो न रखते है, सब्र भीतर पिंजरे में रोते है, वो नर
तालिका की सतह पर, ये हल्की गहरी रेखाएँ, कोई लम्बी, कोई छोटी, कोई पतली। तालिका की सतह पर, ये हल्की गहरी रेखाएँ, कोई लम्बी, कोई छोटी, कोई पत...